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महकाखुर्द की महिलाओं ने साबित किया, मजबूत इच्छाशक्ति हो तो सब कुछ मुमकिन

24/12/2020

दुर्ग  मजबूत इच्छा शक्ति हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं हैये साबित किया है पाटन ब्लॉक के महकाखुर्द की महिलाओं ने । वर्ष 2013 में सेलूद के पास महकाखुर्द गांव की कुछ महिलाओं ने गरिमा स्व-सहायता समूह का गठन किया। शुरुआत में थोड़े-थोड़े रुपए जमा करने का काम किया जाता थाताकि जरूरत पड़ने पर समूह की किसी महिला को लोन के रूप में रुपए प्रदान की जा सकेइससे महिलाओं में बजत की आदत विकसित हुई। लेकिन समूह की गतिविधि इतने में ही सीमित होकर रह गई थी। गांव के खेतों में रोजी मजदूरी कर थोड़े बहुत रुपए कमा लेती थी। 

जनपद पंचायत के माध्यम से मिला प्रशिक्षण और बैंक से उपलब्ध कराया गया 2 लाख रुपए के लोन- समूह की अध्यक्ष द्रौपदी देवांगन ने बताया कि जब उन्होंने ये काम सीखने की इच्छा जताई तो जनपद पंचायत पाटन के द्वारा इच्छानुसार प्रशिक्षण दिलवाया गया। गरिमा स्व-सहायता समूह को चेन लिंक फेंसिंग बनाने का प्रशिक्षण दिया गयाफिर इसके बाद बैंक लिंकेज के माध्यम से इस समूह को सिर्फ 1 प्रतिशत ब्याज पर 2 लाख रुपए का ऋण उपलब्ध कराया गया। 

अपनी कड़ी मेहनत से लिए गए ऋण का एक लाख रुपए लौटा भी चुकी हैं महिलाएं- समूह की कोषाध्यक्ष नूतन यादव बताती हैं कि गरिमा स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिन-रात मेहनत कर आधे ऋण की अदायगी भी कर दी है। समूह ने अब तक करीब ढाई लाख रुपए का कच्चा माल खरीदा है। बाजार के रुख के अनुसार लोहे के तार की कीमत होती है 45 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से तार खरीदते हैं। जाली बनने के बाद 60 से 65 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री हो जाती है।