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बलरामपुर में नक्सलियों ने अपहरण किये कर्मचारियों को 12 के बाद छोड़ा

11/12/2020

बलरामपुर ।  बलरामपुर जिले के सामरी थाना क्षेत्र से 12 दिन पहले अपहृत तीनों कर्मचारियों को नक्सलियों ने छोड़ दिया है । अपहरण के बाद तीनों कर्मचारियों को नक्सली सीधे छत्तीसगढ़ व झारखंड की सीमा पर स्थित बूढ़ापहाड़ ले गए थे। यहां घने जंगल में तीनों कर्मचारियों को रखा गया था। गुरुवार की शाम नक्सलियों ने अपहृत कर्मचारियों को जंगल से बाहर निकाला। पैदल तीनों को सबाग- चुनचुना मार्ग पर ग्राम पीपरढाबा के पास लाकर छोड़ दिया था। यहां से तीनों कर्मचारी पैदल ही अपने अपने घर लौट गए हैं। अभी तक पुलिस की ओर से इन कर्मचारियों से पूछताछ नहीं की गई है। अपहृत कर्मचारियों के वापस लौट आने से स्वजनों ने राहत की सांस ली है।पूरे मामले को लेवी वसूली से जोड़कर देखा जा रहा है।

बीते 28 नवंबर की रात सशस्त्र नक्सलियों ने बलरामपुर जिले के नक्सल प्रभावित सरईडीह में रामधनी यादव के यहां दबिश दी थी। रामधनी यादव हिंडालको के राजेंद्रपुर माइंस में बतौर सुपरवाइजर ठेका कंपनी का काम देखता था। नक्सलियों ने उसे घर से उठा लिया था। यहां से छत्तीसगढ़ व झारखंड की सीमा पर स्थित हिंडालको के कुकूद माइंस से पहले कांटा घर में पहुंचे थे। कांटा घर के सुरक्षा में लगे दो कर्मचारी सूरज सोनी व अजय यादव को भी कब्जे में कर लिया था। नक्सलियों ने ग्राम जलजली में मनोज यादव व शिवबालक यादव की पिटाई की थी। गंभीर हालत में इन दोनों को छोड़कर नक्सलियों ने तीनों कर्मचारियों का अपहरण कर लिया था। पिछले 12 दिनों से अपहृत कर्मचारियों के स्वजन चिंतित थे। न तो कर्मचारियों का कोई सुराग लग रहा था और न ही स्वजनों तक नक्सलियों की ओर से कोई संदेश पहुंच रहा था।

छत्तीसगढ़- झारखंड की सीमा पर लगातार गश्त और सर्चिंग का दावा करने वाली पुलिस इस मामले में बार- बार यही दोहराती रही कि स्वजनों की ओर से किसी प्रकार की कोई मौखिक अथवा लिखित सूचना पुलिस को नहीं दी गई है इसलिए पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध नहीं किया है।शुरुवाती दिनों में तो पुलिस नक्सलियों द्वारा अपहृत किए जाने की संभावना से ही इनकार कर दिया था। पुलिस अधिकारी यही बोल रहे थे कि जब तक स्वजन सामने नहीं आएंगे तब तक कैसे माना जाए कि नक्सलियों ने अपहरण किया है। बाद में पुलिस पर दबाब बढ़ने पर पुलिस अधिकारी यह दावा जरूर कर रहे थे कि कर्मचारियों की खोजबीन अपने स्तर से की जा रही है।

पूर्व में इस इलाके में ऐसी घटनाएं हो चुकी थी इसलिए उन्ही अनुभव के आधार पर पुलिस की रणनीति चल रही थी। पूरे मामले में पुलिस खुद को पीछे रख कर हिंडालको प्रबंधन, ठेका कंपनी के माध्यम से ही नक्सलियों के चंगुल से अपहृत कर्मचारियों को मुक्त कराने का प्रयास करने में लगी थी। घटना के बाद से अपहृत कर्मचारियों के स्वजनों द्वारा लगातार नक्सलियों से गुहार लगाई जा रही थी कि उन्हें रिहा कर दिया जाए क्योंकि उनके परिवार में कोई दूसरा कमाऊ सदस्य नहीं है। उनके समक्ष आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यदि अपहृत कर्मचारी कामकाज के लिए वापस नहीं लौटे तो उनका जीवन कष्टकर हो जाएगा। शुक्रवार की सुबह अपहृत कर्मचारियों के स्वजनों के लिए नई खुशी लेकर आया जब तीनों अपने-अपने घर वापस लौट गए।

शाम को अचानक जंगल से बाहर निकाला कर्मचारियों को

अपहृत कर्मचारियों को भैया पता नहीं था कि गुरुवार शाम को उन्हें जंगल से बाहर निकाला जाएगा।अचानक शाम लगभग छह बजे उन्हें बूढ़ा पहाड़ से सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल दिया गया। चार- पांच नक्सली अपहृत कर्मचारियों को साथ लेकर पैदल ही जंगल से रवाना हुए। मध्य रात्रि के बाद तीनों अपहृत कर्मचारियों को ग्राम पीपढाबा के पास लाकर छोड़ दिया। पीपरढाबा, सबाग से चुनचुना मार्ग पर पड़ता है। यहां से पक्की सड़क से चलते हुए सीधे सामरी पहुंच जाने की जानकारी देकर तीनों कर्मचारियों को नक्सलियों ने छोड़ दिया।सुबह तक तीनों कर्मचारी अपने- अपने घर पहुंच चुके थे।

मंशा पूरी नहीं हुई इसलिए की मारपीट

जिन दो कर्मचारियों के साथ नक्सलियों द्वारा मारपीट की गई थी, वे सामरी क्षेत्र के बॉक्साइट खदान में मुंशी का काम करते थे। सूत्रों के मुताबिक मनोज यादव व शिवबालक यादव तक पूर्व में नक्सलियों द्वारा कुछ संदेश पहुंचाया गया था। नक्सलियों की मंशा पूरी नहीं हो पाने के कारण इन दोनों की बेदम पिटाई की गई थी। दोनों को अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया था। इनके स्वास्थ्य में सुधार है। तीन कर्मचारियों के अपहरण की घटना के बाद से सामरी क्षेत्र में संचालित हिंडालको के बॉक्साइट खदानों में भय का माहौल है। दूरस्थ व नक्सल प्रभावित इलाकों के खदानों में जाने से सुपरवाइजर सहित अन्य बाहरी अधिकारी सतर्कता बरत रहे है हालांकि पुलिस यह दावा कर रही है कि समूचे क्षेत्र में फोर्स लगातार मूवमेंट कर रही है।