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पाटन से खिचड़ी खाकर लौटे सांसद विजय बघेल, क्या अब अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को पूरी करने के लिए फिर से भीड़ जुटा पाएंगे ?

27/10/2020
पाटन की खिचड़ी का स्वाद समर्थकों को पसंद आया क्या ?
सांसद के आंदोलन के चक्कर में अंदर हुए कार्यक्रता अभी कहां है ?
सांसद विजय बघेल अपने गृह ग्राम को क्या आदर्श ग्राम मानते हैं ?

पूरब टाइम्स , भिलाई. मोदी लहर से , दुर्ग संसदीय क्षेत्र से  जीत का परचम फैलाने वाले भाजपा के सांसद विजय बघेल , यूं तो पूर्व के जुझारू व जागरुक भाजपाई कार्यकर्ता माने जाते थे  परंतु सांसद बनने के बाद उनके कार्याचरण से उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता हताशा महसूस कर रहे हैं . हो सकता है कि सांसद अब पार्षदों की पार्टीगत राजनीति में नहीं पड़ना चाहते हों .  भिलाई निगम में भाजपा पार्षद वार्डों में निगम आयुक्त की मनमानी पर भी अपने मातहत जन प्रतिनिधियों को सहारा व संरक्षण देने कभी सामने नहीं आये . चरोदा नगर निगम में तो खुद उनकी पार्टी भाजपा की मेयर से , वहां के कमिश्नर , जितना बता सकें उससे भी ज़्यादा अनुचित व्यवहार करते हैं जिसमें मेयर को प्रदत्त की जाने वाली सुख सुविधाओं को छीनने के अतिरिक्त उनके मूलभूत अधिकार का हनन भी करते हैं . सब कुछ जानने के बाद भी सांसद द्वारा शासन- प्रशासन स्तर पर आयुक्त के विरुद्ध क्रायवाही की अनुशंसा तो दूर , समझाइश देने की भी ज़हमत नहीं उठाई . अब रायपुर में जाकर अपनी खिचड़ी- अनशन से स्व-अभिभूत होकर , भूपेश सरकार को भगाने के दिवा स्वप्न देख रहे हैं . स्थानीय स्तर पर उनके चुनाव में रात-दिन कार्य करने वाले कार्यकर्ता , अब सोचने पर मजबूर हो गये हैं कि सांसद महोदय अब बड़े राजनेता बन गये हैं जिस तरह से उनकी ही पार्टी की दुर्ग की एक मैडम हो गईं थीं , अब “ उन्हीं सुश्री की तरह” स्थानीय व छोटी समस्या से उनको कोई लेना देना नहीं है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट .....

भिलाई और रिसाली निगम के परिसीमन मामले में सांसद विजय बघेल की लुकाछिपी वाली भूमिका पर जनता की नजर नहीं है क्या ?

भिलाई का परिसीमन मामला इन दिनों न्यायालय के समक्ष कार्यवाही प्रक्रिया में है और इस परिवाद पर होने वाली सुनवाई पर सभी की नजर है . इसके साथ - साथ भिलाई निगम के मतदाता यह आकलन कर रहे है कि सांसद विजय बघेल भिलाई के परिसीमन मामले में कैसे लुकाछिपी वाला राजनीतिक खेल कर रहे है ? उल्लेखनीय है कि परिसीमन मामला सीधे भाजपा के पार्षदों के निर्वाचन क्षेत्र को प्रभावित करेगा ,  ऐसा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आरोप पूर्व में लगाए जा चुके है , जिसको सांसद अनसुना कर रहे है . परिणाम स्वरूप परिसीमन मामले में भाजपा समर्थित लोग न्यायालय तक पहुंचे क्योंकि उनकी सुनवाई जिला प्रशासन स्तर पर नहीं हुई और भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा की गई दावा आपत्तियों को ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया . सांसद विजय बघेल इस परिस्थिति से भली भांति अवगत है लेकिन इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रहे हैं . 

सांसद निवास वाले वार्ड की ‘ शाही अंदाज ‘ वाली सुख सुविधाओं से दुर्ग लोकसभा वंचित क्यों है ?

सांसद विजय बघेल क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं की स्थति क्या है ? यह जानने के लिए सांसद अपने आलीशान वाहन से बाहर निकल कर नहीं आते है . सांसद की वातानुकूलित गाड़ी और सर्व सुविधायुक्त कार्यस्थल से दुर्ग की जनता की समस्याओं का भी दर्शन सांसद विजय बघेल को नहीं होता है .  जब जनता अपनी व्यथा और परेशानी लेकर सांसद निवास पहुंचती है , तब सांसद निवास के निगम वार्ड में विकसित की गई शाही अंदाज की सुख सुविधाओं को देखकर यह जान जाती है कि सांसद विजय बघेल को दुर्ग लोकसभा की जन समस्याओं का आभास क्यों नहीं होता है और क्यों सांसद भिलाई निगम के मामलों में पाटन जैसा गैरकानूनी अड़ंगा डालने का विचार नहीं कर पाते है . उल्लेखनीय है कि सांसद निवास कार्यालय द्वारा आवेदकों से परिक्रमा करवाए जाने की अपेक्षाओं की चर्चा भी इन दिनों जोर पकड़ रही है . 

कानूनी प्रक्रिया पर पूरा विश्वास रखने वाले भिलाई के भाजपा कार्यकर्ता क्या पहले से जानते थे कि सांसद विजय बघेल को खिचड़ी बेहद पसंद है ?

जब भिलाई के नए 70 वार्डो का परिसीमन मामला जिला प्रशासन के पास कार्यवाही प्रक्रिया में था , तब भाजपा के कार्यकर्ता , कांग्रेस की राज्य सरकार के दबाव में कार्यरत, जिला प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखने में असहज महसूस कर रहे थे . ऐसे समय में भाजपा कार्यकर्ताओं को सांसद की अनुपस्थिति बेहद खल रही थी . बावजूद इसके भिलाई के संघर्षरत भाजपा कार्यकर्ताओं ने कानून हाथ में नहीं लिया और पाटन क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के समान सांसद विजय बघेल के बहकावे में आकर भिलाई वालों ने कानून हाथ में लेने की गलती नहीं की .  इसके विपरित भिलाई के भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपनी बौद्धिक क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवहार शैली का परिचय देकर पूरे लोकतांत्रिक तरीके से भिलाई के नए परिसीमन मामले को न्यायालय के समक्ष सप्रमाण प्रस्तुत कर दिया .  सांसद विजय बघेल आज भी तमाशाबीन की भूमिका में नजर आ रहे हैं इसलिए भिलाई के कार्यकर्ता पाटन की खिचड़ी का अनुभव लेने के बाद यह समझ गए हैं कि भिलाई के जागरूक कार्यकर्ता कानूनी कार्यवाही में फंसने से बच गए,  नहीं तो परिसीमन मामले में अंदर भी होते और सांसद इस मामले में राजनीति करके पाटन जैसी स्वादिष्ट खिचड़ी खाकर अपनी राजनीति भी चमकाते और अपनी भविष्य की राजनीतिक भूमिका भी बनाते .