Poorabtimes

जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



Detail

सांसद विजय बघेल ने तथाकथित आंदोलन करके सुर्खिया बटोर ली लेकिन कानूनी कार्यवाहियों का सामना करने वाले कार्यकर्ताओं को क्या मिला ?

20/10/2020

प्रदेश शासन ने सांसद विजय बघेल के आंदोलन को नजरंदाज कर दिया ?
दुर्ग जिला प्रशासन ने भी सांसद के आंदोलन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ?
छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्रियों ने सांसद के आंदोलन को समाप्त करवाया दिया ?


पूरब टाइम्स . अंतत: दुर्ग के सांसद विजय बघेल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया . ऐसा लगता है कि पूरब टाइम्स के अनेक सुधि पाठकों की तरह भाजपा के हाई कमान व प्रदेश नेतृत्व को अनशन के कारण व उसके लिये इतने ज़्यादा संघर्ष-प्रचार करने  को ठीक से पचा पाना मुश्किल हो रहा था. जिस तरह से इस मामले का पटाक्षेप हुआ उससे अब सतह पर कई प्रश्न उठकर आ रहे हैं ? क्या यह अनशन केवल सांसद के जुझारुपन को फिर से जन-साधारण के सामने दिखाने की कोशिश थी ? क्या यह अनशन दुर्ग जिला भाजपा के अन्य गुटों पर अपना वर्चस्व साबित करने की पहल थी ? क्या इस अनशन से एक बार फिर से भाजपा में उनके मुख्य विपक्षी की भूमिका को दिखाने की शुरुआत थी ? जो भी हो पर यह तो साफ दिखाई दिया कि इस अनशन से जिला प्रशासन व छत्तीसगढ़ की कांग्रेसी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी . इसके बावजूद विश्लेषकों का यह कहना है कि पिछले डेढ़ साल में भाजपा के किसी नेता द्वारा  भिड़कर एक प्रदेश सरकार विरोधी माहौल बनाने की सबसे बड़ी कोशिश दिखी ( मुद्दे या बिना मुद्दे के ) .  अब आम जनता अचानक अनशन समाप्त करने के कारण को शक की निगाह से देखने लगी है. यदि शीघ्र ही सांसद विजय बघेल ने किसी अन्य मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार को नहीं घेरा तो उनकी फेस वेल्यू बेहद कम हो जायेगी. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..


सांसद विजय बघेल के आंदोलन के बाद किसको क्या हासिल हुआ ?

कानून हाथ में लेने वाले लोगों को भली-भांति यह विचार कर लेना चाहिए कि नेताजी के आंदोलन से किसको क्या हासिल हुआ है ? गौर तलब रहे कि पाटन क्षेत्र में तथाकथित आंदोलन करने वाले नेताजी  पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के बड़े नेताओं को धरना स्थल पर बुलवाने में सफल हो गए  जिससे कारण दुर्ग के सांसद का  प्रदेश स्तर का नेता होने का अहसास पाटन क्षेत्र के कार्यकर्ता को करवाने में सफलता मिल गई . नेताजी की राजनीतिक पूछ परख भी बढ़ गई लेकिन दुर्ग सांसद की इस बड़ी उपलब्धि के साथ - साथ यह भी विचारणीय पहलू है कि जिन कार्यकर्ताओं के विरूद्ध प्रकरण दर्ज हुआ है  उनका क्या होगा ?  क्या सांसद के आंदोलन के बाद कानूनी कार्यवाही का सामना करने वाले आरोपियों को आंदोलन किए जाने के एवज में कानूनी कार्यवाही का सामना करने से छुट्टी मिल जाएगी ? अपेक्षित है कि विजय बघेल भाजपा के हाई कमान को इसका स्पष्टीकरण दें और कार्यकर्ताओं को भी इससे अवगत कराएंगे.

मैनपाट/ छत्तीसढ़ के पर्यटन स्थल/ tourist places to visit in mainpat


पाटन क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता जिनके विरूद्ध प्रकरण दर्ज हुआ था उनके प्रकरण में की जा रही कार्यवाही में आंदोलन से कोई प्रभाव पड़ा क्या ?

पुलिस गिरफ्तारियों का विरोध करने के नाम पर सांसद विजय बघेल ने पाटन क्षेत्र में आंदोलन किया . जिसका समर्थन सभी स्थानीय कार्यकर्ताओं ने किया .  चूंकि पहली बार सांसद ने कार्यकर्ताओं की सुध ली थी इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसद को सांकेतिक समर्थन दिया . उल्लेखनीय यह भी है कि भिलाई और चरोदा में आगामी महीनों के बाद निगम चुनाव है इसलिए पार्षद चुनाव के दावेदारों ने भी भ्रमित होकर धरना स्थल पर बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति भी दर्जा करवा दी और कुछ कार्यकर्ताओं ने भिलाई में भी अपनी भड़ास निकाली .  लेकिन जो कार्यकर्ता पाटन में कानून हाथ में लेने के लिए कानूनी कार्यवाही का सामना  इस कोराना काल के विपरीत परिस्थितियों में कर रहे है  उनके विरुद्ध न्यायालय के समक्ष पेश प्रकरण में तर्कसंगत सबूत जुटाने के लिए सांसद ने क्या किया है ? इस प्रश्न पर सांसद ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है .


क्या भाजपा के बड़े नेताओं के निवेदन और आदेश पर सांसद विजय बघेल का अनशन समाप्त हुआ है ?

सांसद विजय बघेल के तथाकथित अनशन को समाप्त करने के लिए जो खिचड़ी खिलाई गई.  वह किसने बनाई ? यह प्रश्न भले ही निरर्थक है लेकिन जिन कार्यकर्ताओं ने सांसद के तथाकथित अनशन को पूरे समय नारे लगाकर समर्थन किया  उनको तब बेहद आश्चर्य हुआ जब सांसद ने अचानक अनशन समाप्त करने पर सहमति जता दी .  वैसे जब अनशन समाप्त करने की घोषणा की गई  तब भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मंच पर उपस्थित थे इसलिए कांग्रेसियों पर आरोप लगाने की कहीं कोई गुंजाइश नहीं है . फिर भी जो आंदोलन आरोपी भाजपा कार्यकर्ताओं की नि:शर्त प्रकरण वापसी पर समाप्त किया जाना घोषित किया गया था  वह आंदोलन अब नाटकीय अंदाज में क्यों समाप्त हो गया है ?  गौर तलब रहे कि आंदोलन के विषय पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस ने तो प्रतिक्रिया नहीं की  इसे विपक्षी रणनीति कहा जा सकता है लेकिन जिला भाजपा ने भी इस आंदोलन पर प्रतिक्रिया नहीं दी  इसका क्या अर्थ लगाया जाना चाहिए ?