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सीएम भूपेश बघेल बोले राजभवन का हो रहा राजनीतिकरण, भाजपा बोली न भूलें मर्यादा

19/10/2020
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार और राजभवन के बीच टकराव के साथ इस सियासी बढ़ती जा रहा है। सरकार द्वारा नियुक्ति राज्यपाल के नए सचिव चार दिन बाद भी राजभवन में ज्‍वाइन नहीं कर पाए हैं। इस बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर राजभवन के राजनीतिकरण का आरोप लगा तल्खी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार करते हुए उन्हें मर्यादा में रहने की नसीहत दी है। 

बता दें कि बंगाल के बाद महाराष्ट्र और अब छत्तीसगढ़ में राजभवन और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। तीनों ही राज्य गैर भाजपा शासित हैं। इसको लेकर पत्रकारों ने मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल से सवाल किया तो उन्‍होंने कहा कि गैर भाजपा शासित राज्यों सरकार के कामकाज में राजभवन का हस्तक्षेप क्यों बढ़ रहा है, यह सवाल भाजपा के नेताओं से ही पूछना चाहिए।

आखिर राजभवन का राजनीतिकरण क्यों किया जा रहा है। बघेल ने कहा कि इसका जवाब केंद्र में बैठे भाजपा के नेता दें। बघेल के इस बयान पर केंद्र के किसी भाजपा नेता ने तो अब तक कुछ नहीं कहा है लेकिन राज्य में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने इसका जवाब दिया है। कौशिक ने कहा कि सत्ता में आने के बाद से लगातार संवैधानिक मर्यादा व गरिमा का उल्लंघन करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल राजभवन से टकराव के रास्ते पर चल रहे हैं और राज्यपाल को संवैधानिक मर्यादा और सीमाएं बताने की हास्यास्पद नौटंकी कर रहे हैं।

कौशिक ने गैरभाजपा शासित राज्यों में राज्यपाल के हस्तक्षेप को लेकर मुख्यमंत्री बघेल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पहले मुख्यमंत्री स्वयं अपनी संवैधानिक सीमाएं तय करें। कुलपति चयन का अधिकार राज्यपाल से छीनकर प्रदेश सरकार ने कौन-सी संवैधानिक मर्यादा का पालन किया? सत्ता में आने के बाद से ही प्रदेश सरकार हर क़दम पर बदलापुर की राजनीति पर आमादा है और संवैधानिक संस्थाओं और मर्यादाओं की अवहेलना करके अपने सत्तावादी अहंकार का शर्मनाक प्रदर्शन कर रही है।

कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल संवैधानिक संकट खड़ा करने और फिर उसे लेकर प्रलाप की राजनीति करने की मानसिकता से ग्रस्त हैं। मुख्यमंत्री बघेल राज्यपाल को सीमा न बताए क्योंकि इस प्रदेश सरकार ने राज्यपाल के अधिकारों को कम करने की कोशिश की है और संवैधानिक संस्थाओं की परंपरा को तोड़ने पर वह उतारू है।