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दुर्ग जिले की राजनीति: ‘छोटे मुख्यमंत्री’ की शंकास्पद भूमिका के कारण क्या दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र में सांसद के समर्थकों की सूची बढ़ती जा रही है...

18/10/2020

पाटन के नेताओं की लड़ाई अब भिलाई तक पहुंच गई है ?




‘छोटे मुख्यमंत्री’ के चापलूसों की फौज न जाने कहां गायब हो गई है ?



इधर दुर्ग के सांसद के समर्थकों का उत्साह बढ़ाने दुर्ग के बड़े नेता अनुपस्थित क्यों है




पूरब टाइम्स . दुर्ग के सांसद ने अपने समर्थकों द्वारा पाटन में शराब दुकान में कथित मारपीट के आरोप पत्र के खिलाफ अनशन कर दिया . हांलाकि यह मुद्दा ज़्यादा व्यक्तिगत टाइप का लगता है परंतु इसे राजनैतिक रंग दे दिया गया . सूत्रों के मुताबिक इस मामले के इतने बढ़ जाने का कारण कुछ कांग्रेसी , मुख्यमंत्री के एक निज सचिव के द्वारा मामले को ठीक तरह से हैंडल नहीं करना , बता रहे हैं . इस निज सचिव के द्वारा जिले के अनेक शासकीय कार्यों में दखल के कारण , बाहरी लोगों को छोड़िये , कतिपय कांग्रेसियों द्वारा ‘ छोटा मुख्यमंत्री नाम से पुकारा जाता है. जहां दुर्ग के सांसद विजय बघेल  द्वारा , ऐसे मामले में अब तक का सबसे बड़ा विरोध दिखाने से  आम जनता हैरान है , वहीं दुर्ग जिले के अन्य वरिष्ठ नेता गण प्रेम प्रकाश पाण्डेय व सरोज पाण्डेय व जिला –मण्डल अध्यक्षों द्वारा किसी भी प्रकार से समर्थन ना करना , अपने घर में सांसद के प्रभाव पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है . फिर भी ऐसा लगता है कि आपसी अन्दरूनी लड़ाई से जूझ रही , मुद्दा विहीन भाजपा के अन्य नेताओं के हाथ, अपनी उपस्थिति दिखाने के लिये एक मंच मिल गया है. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...





प्रदेश के भूतपूर्व दिगज्जों ने भाषण दे दिया लेकिन जिले का 
प्रशासनिक अमला अपने निर्वाचित सांसद के तथाकथित अनशन को नजरंदाज क्यों कर रहा है



सांसद विजय बघेल अपना तथाकथित अनशन करके , पूरे दुर्ग को अपनी ओर 
आकर्षित करने का प्रयास कर रहे है लेकिन जिले का प्रशासनिक अमला अपने ही सांसद की अविधिक गतिविधि को नजरंदाज कर रहा है . इसका कूटनीतिक कारण क्या है ? यह मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगा लेकिन अभी सांसद विजय बघेल विषम वैधानिक परिस्थिति में फंसते नजर आ रहे हैं क्योंकि अनशन स्थल पर जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कोई पहल नहीं की है . जिले के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने भी सांसद के तथाकथित अनशन से स्वयं को दूर रखा है . अब आगे होगा इसका इंतजार सभी को इंतजार है.




सांसद विजय बघेल और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी की टकराहट से पाटन क्षेत्र की ग्रामीण राजनीति गरमा गई है 




एक तरफ स्वर्गीय अजित जोगी के राजनीतिक वारिसों के साथ मरवाही सीटके उपचुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री के राजनीतिक प्रभाव को साबित करने की परीक्षा चल रही है तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के करीबी लोगों के कारण मुख्यमंत्री की छवि धूमिल हो रही है क्योंकि शराब लूट के आरोपियों के विरूद्ध चल रही न्यायालयीन मामले में मुख्यमंत्री के करीबी लोगों ने अपना प्रभाव दिखलाने के चक्कर में पाटन क्षेत्र के राजनीतिक मामलों को हवा दे दी है.  जिसके कारण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दो मोर्चे पर अपनी राजनीतिक भूमिका को बचाने की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं . मुख्यमंत्री अपने करीबियों के कारण अब इस प्रश्न का उत्तर जनता को देने के लिए मजबूर हो गए है कि लॉक डाउन के समय में दारू दुकान खुलवाना कितना लोकहित का है ?



सरोज पांडेय और प्रेम प्रकाश पांडेय तक  सांसद विजय बघेल के अनशन का समाचार नहीं पहुंचा है क्या ?



 सांसद विजय बघेल को अपने ही लोक सभा क्षेत्र के बड़े नेताओं का 
समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है . जबकि सांसद के अनशन और विरोध प्रदर्शन पर बैठने के बाद प्रदेश स्तर के कई भूतपूर्व पदाधिकारी व अन्य सांसदों के द्वारा धारणा स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा दी गई है . उल्लेखनीय है कि भजापा का पाण्डेय गुट अपने ही भाजपा के सांसद के समर्थन में खड़ा  हुआ नजर नहीं आ रहा है, जिसके कारण 
भाजपा के अंदर की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है और दुर्ग का भाजपा कार्यकर्ता यह निर्णय नहीं ले पा रहा है कि आखिर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसके साथ है और पाटन मामले में सांसद की जो प्रत्यक्ष लड़ाई मुख्यमत्री के निज सचिव के साथ चल रही है , उसमे भाजपा के कार्यकर्ता को मौन रहना है या किस प्रकार का समर्थन करना है .