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सांसद विजय बघेल : क्या प्रदेश सरकार को घेरने के लिए उनकी असफल नीतियां व लोक कल्याण के मुद्दे नहीं थे जो शराब दुकान पर हुई आपराधिक गतिविधि पा हड़ताल किये बैठे ...

16/10/2020
सांसद विजय बघेल का धरना प्रदर्शन कई शंकाओं को क्यों जन्म दे रहा है ?

दुर्ग की राजनीति में सबसे अग्रणी स्थानों पर विराजमान बघेल नेतृत्व आखिर क्या चाहता हैं ? 

शराब दुकान के आसपास घटित होने वाली आपराधिक घटना का राजनीति करण क्यों हो रहा है ?



पूरब टाइम्स . ऐसा लगता है कि भाजपा के दुर्ग के सांसद , किसी भी तरह से राज्य की कांग्रेस सरकार के विरोध में धरना प्रदर्शन कर , अखबारों में सुर्खियां पाने, अपने हाई कमान की नजऱों पर ऊपर आने व जनता के सामने अपने विरोधी आक्रामक तेवर दिखाने के लिये बेहद उत्सुक थे . इसीलिये वे किसी भी मामले की तलाश में थे. इस बीच उन्हें महसूस हुआ कि पाटन की शराब दुकान में हुए हमले व लूट के मामले में , वे सरकार को घेर लेंगे. पुलिस में रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में उनका एक स्टाफ व कुछ भाजपा के लोग शामिल थे . बस, वे बैठ गये , शक्ति प्रदश्र्ण व विरोध दिखाने . हो सकता है इस मामले में ज़बरदस्ती , उक्त लोगों को फंसाया गया हो पर उनमें से कुछ लोग सचमुच में उस घटना में संलिप्त भी हो सकते हैं. ऐसे में यह मामला न्यायालयीन हो जाता है. इस पर राजनीति से आम जनता हैरान है कि सांसद  विजय बघेल के पास , भूपेश बघेल सरकार के विरुद्ध अनेक नीतिगत मामले , जनता के हितों की रक्षा ना कर सकने के मामले व अनेक स्कीम फेल होने के मामले , उठाने के लिये होते हुए एक अपराधिक मामले में इतना आक्रामक होने की क्या ज़रूरत थी ? यह मामला व्यक्तिगत लगता है और प्रादेशिक स्तर या राष्ट्रीय स्तर पर इसका कोई औचित्य नहीं है . दबे छुपे रूप् से अब कई लोग सांसद पर भी उंगलियां उठाने लगे हैं . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ... 



क्या सांसद विजय बघेल को न्यायालयीन कार्रवाई प्रक्रिया पर विश्वास नहीं है ?

 विगत दिनों सांसद विजय बघेल के समर्थकों द्वारा एक मैसेज दिया गया वह यह कि, "छत्तीसगढ़ के दमनकारी कांग्रेस सरकार के खिलाफ सांसद विजय बघेल आज से पाटन में अनशन पर रहेंगे . राजनीतिक द्वेष के चलते झूठा आरोप लगाकर हमारे साथियों को जेल भेजने का कार्य निंदनीय है .  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तानाशाही रवैया के खिलाफ पाटन सहित छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आवाज बुलंद हो रही है . यह अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारे साथी निशर्त रिहा नहीं हो जाते . हर जोर जुल्म के टक्कर से, संघर्ष हमारा नारा है " जैसे ही यह मैसेज वायरल हुआ तो पाटन क्षेत्र की दारू दुकान में घटित तथाकथित अपराधिक मामला चर्चा में आया और इस मामले ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया लेकिन सांसद विजय बघेल ने जनता के समक्ष अब तक यह जगजाहिर नहीं किया कि आखिर न्यायालयीन चुनौती का सामना करने की बजाय अनशन का रास्ता सांसद ने क्यों चुना है और क्या इसी रास्ते पर चलकर न्यायालयीन कार्यवाहियों प्राभावित करने का संदेश सांसद जनता को देना चाहते हैं ? 



क्या अनशन और गैर कानूनी जमावड़ा करके किसी आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ाया का सकता है ?

दुर्ग जिले की कानून व्यवस्था बड़ी विचित्र अवस्था में पहुंच गई है . पाटन क्षेत्र, इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है . जिसका कारण बघेल परिवार का आंतरिक टकराव कहे जाने पर शायद किसी का दो मत नहीं होगा . सांसद विजय बघेल प्रशासनिक कार्यवाही के विरुद्ध  ,अपने रिश्तेदार मुख्यमंत्री के विरूद्ध,  धरना प्रदर्शन स्थल पर अपने प्रियजनों से नारे लगवा रहें है . गौर तलब रहे कि मुख्यमंत्री और सांसद बनने के बाद से अब तक आपस में ये दोनों नेता इस तरह से सड़क पर आकर कभी नहीं टकराए हैं लेकिन अभी एक ऐसे मामले में सांसद विजय बघेल अपना शक्ति प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहे हैं , जो बिना किसी होहल्ला के न्यायालय में सुलझ  सकता है . लेकिन इसके विपरित अनशन कर बड़ी संख्या में भीड़ इक_ा करके सांसद न्यायालय की लड़ाई को सड़क किनारे बैठकर लडने का प्रयास कर रहे हैं  ? 



कहां है छोटा मुख्यमंत्री, विरोध प्रदर्शन पर मौका मुआयना करने कब आयेगा ?

वैसे तो दुर्ग जिले की सभी छोटी बड़ी राजनीतिक गतिविधियों में मुख्यमंत्री के निज सचिव की उपस्थिति रहती है . जन साधारण के अनुसार,  तथाकथित छोटा मुख्यमंत्री निरक्षण करने के नाम पर दौड़ भाग करते हुए फ़ोटो खींचवाने में सबसे अग्रणी भूमिका में नजर आता है और अपना विशेष आतिथ्य सत्कार की अपेक्षित मौन भावना व्यक्त करता प्रतीत होता है . चूंकि यह आम धारणा बन गई है कि छोटा मुख्यमंत्री नाराज हो जाता है तो आयोजकों को अप्रत्यक्ष समस्याओं का सामना करना पड़ता है इसलिए कार्यक्रमों की प्रेस विज्ञप्ति में छोटे मुख्यमंत्री की निर्णायक भूमिका वाली फ़ोटो प्रेस और मीडिया को भेजी जाती है .  लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, संसद विजय बघेल के धरना स्थल के आसपास अभी तक छोटा मुख्यमंत्री नजर नहीं आया है और ना ही किसी भी प्रकार से आवश्यक दिशा निर्देश किसी अधिकारी को दिये हैं . अब आने वाला समय बताएगा कि संसद विजय बघेल के विरोध का सामना करने के लिए धरना प्रदर्शन स्थल पर कौन आयेगा ?