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सुप्रीम कोर्ट ने शादी से पहले दुष्कर्म मामले की कार्यवाही पर लगाई रोक, जानें यह मामला

24/08/2020
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में शादी से पहले दुष्कर्म के एक मामले की चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मुकदमे को खारिज करने की मांग की है। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी व जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, नई दिल्ली के साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश में चल रहे इस मुकदमे की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है।      
                           आइये जानते हैं क्‍या था पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार याचिकाकर्ता व आरोपित के बीच जनवरी, 2013 में मुलाकात हुई। महिला विधवा थी। दोनों लिव इन में रहने लगे। अगस्त, 2013 में विवाद के बाद महिला ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया। वर्ष 2014 में दोनों ने शादी कर ली लेकिन कुछ मतभेदों के कारण मुकदमा जारी रहा। 16 अगस्त, 2019 को महिला ने मुकदमा रद किए जाने की स्वीकृति दे दी लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने दो बार याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने गत गुरुवार को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले पर चार हफ्ते बाद की सुनवाई का फैसला किया।

बीते दिनों ऐसे ही एक मामले में ओडिशा उच्च न्यायालय  ने एक अहम टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाना दुष्‍कर्म के समान नहीं है। जस्टिस एसके पाणिग्रही ने एक निचली अदालत के आदेश को दरकिनार करते हुए और दुष्‍कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी को मंजूर कर ली थी। यह केस ओडिशा के कोरापुट जिले से पिछले साल नवंबर में 19 साल की आदिवासी महिला की दुष्‍कर्म की शिकायत पर एक छात्र की गिरफ्तारी से जुड़ा था। अदालत ने सवाल उठाए थे कि क्या दुष्‍कर्म कानूनों का उपयोग सहमति जन्‍य शारीरिक संबंधों पर लागू किया जाना चाहिए।