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गणेश चतुर्थी पर कोरोना का असर, मूर्तिकारों के पास पसरा सन्नाटा

21/08/2020

दुर्ग। गणेश चतुर्थी पर्व  22 अगस्त से शुरू होगी, लेकिन मूर्तिकारों के यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। कोरोना का असर गणेश चतुर्थी पर भी साफ-साफ देखने को मिल रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले प्रतिमाओं की ब्रिकी न के बराबर हो रही है। गणेश पंडाल सजाने की अनुमति इस बार जिला प्रशासन द्वारा नहीं दी गई है। 

मूर्तिकारों का कहना है कि इस वर्ष भगवान गणेश की मूर्ति की ब्रिकी का काम-धंधा चौपट है। हफ्ता भर पहले से ही लोगो में गणेश उत्सव की पूरी धूम रहती थी, लेकिन कोरोना के चलते खरीदार गायब हैं। केवल मिट्टी द्वारा निर्मित मूर्ति तैयार किए जाते हैं। ये पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होती हैं। इन्हें घर पर भी विसर्जित कर सकते हैं। 

शहर में ही कई जगह बड़े सार्वजनिक पंडाल  सजते हैं, जहां 10 से 12 फीट ऊंची मूíतयां स्थापित होती हैं। गली-मोहल्लों में ही सौ से ज्यादा जगह पंडाल सजते हैं, जहां मध्यम आकार की मूíतयां सजती हैं। घरों में स्थापित की जाने वाली मूíतयों की संख्या तो हजारों में हैं। लेकिन, इस बार कोरोना की वजह से गणेश महोत्सवों की छटा फीकी रहेगी। पंडाल नहीं सजेंगे। शोभायात्राएं भी नहीं निकलेंगी। 

केवल घरों में ही प्रथम पूज्य गणेश की स्थापना की जाएगी। इसका असर मार्केट पर भी पड़ रहा है। कारीगरों ने मूर्तियां बनाकर तैयार कर ली हैं, लेकिन खरीदार ही नहीं पहुंच रहे। पिछले वर्ष के मुकाबले प्रतिमाओं की ब्रिकी न के बराबर है। हर वर्ष भगवान गणेश की मूर्ति की बिक्री बड़े पैमाने पर की जाती है। शहर के हर इलाके से भक्तगण मूर्ति के लिए आते हैं। लेकिन इस बार बिक्री नहीं होने से कारीगरों के परिवार भुखमरी की कगार पर हैं। कारीगरों का कहना है कि पहले एक सप्ताह पहले से ही गणेश उत्सव के लिए मूर्तियां खरीदने के ऑर्डर आना शुरू हो जाते थे लेकिन इस बार न ऑर्डर आ रहे और न ही खरीदार।

मूर्ति बिक्री करने वाले मानदाता ने बताया कि कोरोना का असर भगवान गणेश की मूर्ति की बिक्री पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। पिछले वर्ष 200-250 मूर्तियों का ऑर्डर मिला था। इस बार अब तक मात्र 16 मूíतयों का ही ऑर्डर मिला है। खरीदार की मांग पर इको फ्रेंडली मुर्तिया तैयार की गई  है फिर भी बिक्री बहुत कम हो रही है।