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मुख्यमंत्री के निर्देश के पश्चात मनरेगा कार्य युद्धस्तर पर, दुर्ग में मजदूरों की संख्या 63313

02/05/2020
पूरब टाइम्स दुर्ग।  देश में कोविड संकट को देखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाये रखना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा की सबसे बड़ी भूमिका होती है। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने बीते महीने के पहले सप्ताह को मनरेगा के काम युद्धस्तर पर कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने फिजिकल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन के साथ ही काम कराने के निर्देश भी दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देश के पश्चात एक महीने बाद अब मनरेगा कार्यों को लेकर बहुत सुखद स्थिति है। दुर्ग जिले में लगभग एक हजार कार्य आरंभ हो चुके हैं और यहां पर 63 हजार से अधिक श्रमिक मनरेगा के लिए कार्य कर रहे हैं। जो कार्य आरंभ हुए हैं उनमें सबसे ज्यादा काम जलसंरक्षण से संबंधित हैं। यह ऐसे कार्य हैं जो नरवा योजना के लिए काफी उपयोगी हो सकते हैं। नरवा योजना के माध्यम से उन जलरेखाओं का पुनः चिन्हांकन कर विकास किया जा रहा है जो ऐतिहासिक रूप से थे लेकिन किसी कारण से क्षरित हो गए। इस प्रकार मनरेगा के कार्यों के माध्यम से नरवा योजना को बड़ी सहायता मिलेगी। इसी प्रकार नरवा, गरवा, घुरूवा, बाड़ी योजना के गरवा कंपोनेट के लिए गौठानों में बड़ा काम मनरेगा की मदद से हो रहा है। अब जबकि इतनी बड़ी संख्या में श्रम मनरेगा के लिए लग गया है। यह उम्मीद की जा रही है कि गौठानों में अगले महीने तक मुकम्मल व्यवस्था बन जाएगी। यहां नाडेप, वर्मीकंपोस्ट, शेड आदि निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना के अंतर्गत जलसंरक्षण बड़ा कार्य है। इसके लिए डबरी, तालाब आदि के निर्माण कार्य भी स्वीकृत किए जा रहे हैं। डबरी और तालाबों से जलसंरक्षण तो होगा ही, मत्स्य पालन के लिए भी बेहतर हालात होंगे। उधर पशु शेड भी विकसित किए जा रहे हैं। इस प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्थआ को बेहतर करने युद्धस्तर पर काम हो रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के पश्चात दुर्ग संभाग के सभी जिलों में मनरेगा के कार्यों में तेजी से वृद्धि हुई है। नये कार्यों का चिन्हांकन किया गया है और इन्हें त्वरित स्वीकृत कर इन पर काम आरंभ कराया गया है।